जिंदगी के इस मोडसे पीछे मुडकर देखा ... ... तो लगा
मिले है कितने मददगार, हम भुले है कहना शुक्रिया शुक्रिया
आये थे यहां रोते हुए जा रहे है मुस्कुराते हुए...
इस हसीन सफ़र के लिये ए परवरदिगार तेरा शुक्रिया शुक्रिया
चल रहे थे राहसे, जब लडखडाए कदम ... ...
थामा था हाथ किसी अजनबीने ए अजनबी तेरा शुक्रिया शुक्रिया
जिंदगी के सफ़र मे न जाने कितने उठाए सितम .....
उसीसे सीखा जीना हमने, ए सितमगर तेरा शुक्रिया शुक्रिया
न जाने कितने आए मौसम, न जाने कितने बीते सावन .....
पर ना छूटा साथ जिसका, ए हमसफ़र तेरा शुक्रिया शुक्रिया
जब नही था कोई सहारा, तूफ़ान मे भी न था कोई किनारा ...
उन जख्मोंपे बनके मरहम जो आये, ए यार तेरा शुक्रिया शुक्रिया
अब तो कुछ साँसे बची है
बस थोडी जिंदगानी बची है
न है कोई गिला न कोई शिकवा
तेरे पास बुलाने के लिए ए खुदा तेरा शुक्रिया शुक्रिया.......
दीपा
1 comments:
Simply amazing!!!
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