क्या करे के दिल अब ये संभलता ही नही
किसी चीज से अब बहलता ही नही
दुवा बेअसर है दवा भी नही
इस दर्द के लिए तो जहर भी नही
बुलानेसे आते तो बुलाते न थकते
बहानोंसे आते तो बहाने सौ तक थे
कहो बेवफ़ा या करो बेवफ़ाई
चलो किसी वास्ते हमारी याद आयी
अर्श झुक गया है अब्र भी नही
बीत चला सावन मिली एक बूंद भी नही
खुशी छलके बहारोंमे वीरानोंमे नही
सिर्फ़ आयी तुम्हारी याद , आहट क्यूं नही?
कितने महीने बीते साल खबर ही नही
किसका करे इंतजार कोई आता ही नही
बस एक है चांद , चांदनी की कमी नही
सबको मिले उसका प्यार , कोई जरुरी तो नही
दीपा
Thursday, April 3, 2008
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हिन्दी/Gazal
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