Monday, April 28, 2008

पन्ने जिंदगीके

पन्ना पलटकर देख रही थी जिंदगी पलट जाए तो
आसू को मै रोक रही थी कभी उनकी याद आये तो


पन्ने से उठकर कोई रोज करता है हमसे बातें
हम भी नही भूलें अब तक वो प्यारी मुलाकातें


इन पन्नोंमे सिमटी हुई जिंदगी की कहानी है
कभी लगती है अनोखी तो कभी जानी पहचानी है


इन आते हुए पन्नोंमे न जाने क्या लिखा जाएगा
वो जो है अनदेखा सा कल, सामने कब आयेगा


दीपा

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