Showing posts with label हिन्दी/Gazal. Show all posts
Showing posts with label हिन्दी/Gazal. Show all posts

Friday, June 27, 2008

अफ़साना-ए-हस्ती

अफ़साना-ए-हस्ती क्या बतलाए हम

आसिम तो तुम थे आसिर हम कहलाये

अफ़वाओंके भरोसे न रहो दुनियावालो

दिल चुराया उन्होंने गुनहगार हम कहलाये

अफ़शाइ की जरुरत तो उन्हे है दोस्तों

छुपे नकाब के पीछे और शायिस्ता कहलाये

यूं मासूमियत से न देख हमे जालिम

होश तूने संभाला बेहोश हम कहलाये

सुराग तो ढूंढ ही लेंगे जमानेवाले

तभी तेरे नाम के साथ हम आशिक कहलाये

दीपा

अफ़साना-ए-हस्ती - story of life

आसिम - culprit

आसिर - kaidi

अफ़शाइ - unveiling

शायिस्ता - decent /mannered

Sunday, June 22, 2008

वो बात

शमा बुझने को है पर बात पूरी हो न सकी

बहुत हो गयी बातें मगर वो बात हो न सकी

निगाहें जो जताँ रही वो बात जुबाँ बता न सकी

बहुत हो गयी बातें मगर वो बात हो न सकी

हालचाल तो सुनाए, दिलकी हालत सुना न सकी

बहुत हो गयी बातें मगर वो बात हो न सकी

आँखे हो गयी नम पर ये खलिश कम हो न सकी

बहुत हो गयी बातें मगर वो बात हो न सकी

खूब किये जतन पर ये बैचेनी छुप न सकी

बहुत हो गयी बातें मगर वो बात हो न सकी

नग्म जो छेडी हमने वो दिल के तार छेड न सकी

बहुत हो गयी बातें मगर वो बात हो न सकी

दीपा

जा सको तो जाइयेगा

आनेमे लगाओ देर चाहे जितनी

रुखसे उठे नकाब फ़िर जा सको तो जाइयेगा

महफ़िल ये तराने देगी कितनी

छेडूं जो नग्म-ए-इश्क फ़िर जा सको तो जाइयेगा

ये शमा-ए-नूर रहेगी कितनी

मैं सितारोंसे बेहलाऊं फ़िर जा सको तो जाइयेगा

मैं करूं खलिश बयां कितनी

रुबरु आंखोंसे अयां हो फ़िर जा सको तो जाइयेगा

नाचीज के हिस्से जमीन है कितनी

उसीको सियासत मैं बना लूं फ़िर जा सको तो जाइयेगा

दीपा

Saturday, June 21, 2008

कभी-कभी

कभी उम्र गुजरती है एक मुलाकात के लिए
कभी एक मुलाकात उम्र गुजार देती है

कभी तालाब भी अधुरा प्यास बुझाने के लिए
कभी एक बूंद भी सैलाब ले आती है

कभी बादलोंसे घिरा आसमान है तरसाने के लिए
कभी एक अब्र भी बाढ ले आती है

कभी सहारा-ए-तसव्वुर बचे जीने के लिए
कभी हकीकत ही इतना सताती है

कभी रंजिश की ना जरुरत रुलाने के लिए
कभी खुशियां भी कितना रुलाती है

दीपा

Monday, April 28, 2008

पन्ने जिंदगीके

पन्ना पलटकर देख रही थी जिंदगी पलट जाए तो
आसू को मै रोक रही थी कभी उनकी याद आये तो


पन्ने से उठकर कोई रोज करता है हमसे बातें
हम भी नही भूलें अब तक वो प्यारी मुलाकातें


इन पन्नोंमे सिमटी हुई जिंदगी की कहानी है
कभी लगती है अनोखी तो कभी जानी पहचानी है


इन आते हुए पन्नोंमे न जाने क्या लिखा जाएगा
वो जो है अनदेखा सा कल, सामने कब आयेगा


दीपा

Thursday, April 3, 2008

क्या करे के दिल अब ये संभलता ही नही
किसी चीज से अब बहलता ही नही
दुवा बेअसर है दवा भी नही
इस दर्द के लिए तो जहर भी नही


बुलानेसे आते तो बुलाते न थकते
बहानोंसे आते तो बहाने सौ तक थे
कहो बेवफ़ा या करो बेवफ़ाई
चलो किसी वास्ते हमारी याद आयी

अर्श झुक गया है अब्र भी नही
बीत चला सावन मिली एक बूंद भी नही
खुशी छलके बहारोंमे वीरानोंमे नही
सिर्फ़ आयी तुम्हारी याद , आहट क्यूं नही?



कितने महीने बीते साल खबर ही नही
किसका करे इंतजार कोई आता ही नही
बस एक है चांद , चांदनी की कमी नही
सबको मिले उसका प्यार , कोई जरुरी तो नही

दीपा

Monday, March 24, 2008

शुक्रिया शुक्रिया

जिंदगी के इस मोडसे पीछे मुडकर देखा ... ... तो लगा

मिले है कितने मददगार, हम भुले है कहना शुक्रिया शुक्रिया


आये थे यहां रोते हुए जा रहे है मुस्कुराते हुए...

इस हसीन सफ़र के लिये ए परवरदिगार तेरा शुक्रिया शुक्रिया

चल रहे थे राहसे, जब लडखडाए कदम ... ...

थामा था हाथ किसी अजनबीने ए अजनबी तेरा शुक्रिया शुक्रिया


जिंदगी के सफ़र मे न जाने कितने उठाए सितम .....

उसीसे सीखा जीना हमने, ए सितमगर तेरा शुक्रिया शुक्रिया


न जाने कितने आए मौसम, न जाने कितने बीते सावन .....

पर ना छूटा साथ जिसका, ए हमसफ़र तेरा शुक्रिया शुक्रिया


जब नही था कोई सहारा, तूफ़ान मे भी न था कोई किनारा ...

उन जख्मोंपे बनके मरहम जो आये, ए यार तेरा शुक्रिया शुक्रिया


अब तो कुछ साँसे बची है

बस थोडी जिंदगानी बची है

न है कोई गिला न कोई शिकवा

तेरे पास बुलाने के लिए ए खुदा तेरा शुक्रिया शुक्रिया.......


दीपा